आया सावन झूम के..

लौटते मानसून में बदरा ने वो घनघोर करवट ली कि सबको तर करती जा रही है। सामान्यतया: राजस्थान में मानसून का जोर 15 अगस्त के आसपास ही रहता है। ज्यादा से ज्यादा जन्माष्टमी तक। उसके बाद मान लिया जाता है कि बारिश न के बराबर होगी इस बार तो शायद इंद्र देव ने सभी रिकॉर्ड तोड़ने की कसम खा ली हो। मानसून इस बार जून महीने के बीच में ही आ गया, जबकि इसका समय जुलाई के पहले या दूसरे सप्ताह में होता है। इसके बाद जब मानसून समाप्ति की ओर होता हैउस समय बारिश पूरी तरह से थम गयीमान लिया गया कि बरसात एक या दो बार से ज्यादा नहीं होने वाली, अगस्त के अंतिम सप्ताह में बारिश ने जोर पकड़ा है, जो बदरा गिराई है, उससे तो यही लगता है कि ये राजस्थान की मिट्टी है..यहां सब कुछ हो सकता है..