126 दिन जेल में..सत्ता भी गयी लेकिन छवि बाकी है मेरे दोस्त!
दिल्ली हारकर भी जीते अरविंद केजरीवाल, आबकारी नीति मामले में बरी होकर ‘हीरो’ बन गए, अब भरोसा लौटाना सबसे बड़ी चुनौती
90 के दशक में शाहरूख की एक फिल्म आयी थी ‘बाजीगर’. उसका एक डायलॉग बड़ा फेमस हुआ ‘हार कर जीतने वाले को ‘बाजीगर’ कहते हैं..’. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल पर यह डायलॉग एकदम फिट बैठता है. दिल्ली शराब घोटाला: एक ऐसा दंश है जिसने आम आदमी पार्टी को ऐसा डसा कि किसी ने पानी तक नहीं मांगा. इस मामले के चलते मनीष सिसोदिया, संजय सिंह जैसे जाने माने नेताओं के साथ साथ खुद सीएम रहते हुए अरविंद केजरीवाल तक नप गए.
केजरीवाल सीएम रहते हुए भी 126 दिन जेल में रहे जबकि तत्कालीन डिप्टी सीएम एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया तो 503 दिन (करीब डेढ साल) सलाखों के पीछे रह लिए. यही एकमात्र वो मुद्दा था जिस पर दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ा गया और परिणाम वही आया, जिसकी उम्मीद थी. लगातार तीन बार कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को अकेले धूल चटाने वाली आम आदमी पार्टी केवल 22 सीटों पर सिमट गयी.
शिक्षामंत्री के सामने बच्चों ने उठाया विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य व करियर काउंसलिंग का मुद्दा
इससे पहले 2014 में नवी नवेली आम आदमी पार्टी ने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में शीला दीक्षित के दो दशक के साम्राज्य को तहस नहस कर दिया. बीजेपी तो कहीं दूर दूर तक थी ही नहीं. हालांकि पहली बार कांग्रेस के साथ मिली जुली सरकार तो बनायी लेकिन 6 महिने बाद ही हुए चुनावों में 67-3 से मुकाबले को एक तरफा कर दिया. उसके बाद 2020 में एक बार फिर 63-7 से बीजेपी को धूल चटाई. कांग्रेस तो खाता तक नहीं खोल पायी थी. बशर्तें लोकसभा चुनाव में दोनों ही बार आप की ‘झाडू’ मोदी की प्रचंड आंधी में उड़ गयी.
उसके बाद आया दिल्ली की नई शराब नीति का वो जहरीला अध्याय, जिसे आम आदमी पार्टी कभी याद तक नहीं रखना चाहेगी. इसके चक्कर में न तो नेता बचे और न साफ सुधरी व दागरहित छवि रखने वाले पार्टी के नेता. एक ऐसा आरोप, जिसका न कोई गवाह है, न कोई सबूत और न ही कोई शिकायत. बस अंधेरे में तीर चलाने जैसी एक कोरी संभावना है. ऐसा मानना है दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने. कोर्ट के अनुसार, आबकारी नीति से जुड़े सीबीआई मामले में कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा ‘केस इतना मनगढ़ंत है कि मुकदमा चलाने के लिए एक भी सबूत नहीं है.’ कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी 23 आरोपियों को दोष मुक्त करार दिया.
मामले से बरी होते ही अरविंद केजरीवाल ने सीधे पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह से पंगा ले लिया है. अब केजरीवाल जेल में बिताए गए अपने 126 दिनों का हिसाब मांग रहे हैं. केजरीवाल का प्रेस कॉन्फ्रेंस के सामने ‘सच सामने आ गया’ कहते हुए बिलख बिलख कर रोना झूठा जरूर हो सकता है लेकिन दिल्ली में मोहल्ला क्लिनिक, मुफ्त बिजली और शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार कुछ ऐसे काम हैं, जो जनता के जहन में ताजा हैं. अब दोगुने वेग के साथ केजरीवाल अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा में उतरेंगे.
अरविंद केजरीवाल भले ही पिछले कुछ चुनावों में, चाहें वो राजस्थान का चुनाव हो, गुजरात हो या फिर हरियाणा, कहीं सफल न रहे हों, लेकिन कांग्रेस को बैकफुट पर लाने का काम जरूर किया है. उनके उम्मीदवार न होते तो शायद कांग्रेस ज्यादा सीटे जीतने में कामयाब होती. केजरीवाल न केवल बीजेपी से अपनी सियासी जंग लड़ रहे हैं, बल्कि कांग्रेस से भी दो दो हाथ कर रहे हैं. अब देखना होगा कि अरविंद केजरीवाल किस तरह से अपनी राजनीति की दूसरी सियासी पारी खेल पाते हैं.