राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 पर मंथन के लिए जुटे शिक्षाविद

  • आरएससीआरटी की ओर से तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आगाज
  • निदेशक माध्यमिक शिक्षा श्री सीताराम जाट ने दी विभाग के नवाचारों की जानकारी

जयपुर/उदयपुर। राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (आरएससीईआरटी) की ओर से उदयपुर में सोमवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के क्रियान्वयन व विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के लिए शिक्षाविदों के तीन​ दिवसीय महाकुंभ का आगाज हुआ। ‘शिक्षा में परिवर्तन: एनईपी 2020 और उसके बाद के संदर्भ में सर्वोत्तम प्रथाओं को आगे बढ़ाना’ विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर के शिक्षा विशेषज्ञों ने भाग लिया। विभिन्न सत्रों में आयोजित चर्चाओं के दौरान विशेषज्ञों ने शिक्षण में प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रयोग, आकलन प्रणाली में सुधार, शिक्षक प्रशिक्षण की नई दिशा, प्रारंभिक कक्षाओं में भाषा आधारित अधिगम और सामुदायिक सहभागिता जैसे विषयों पर गहन मंथन किया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर उदयपुर में राष्ट्रीय सेमीनार
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर उदयपुर में राष्ट्रीय सेमीनार

उद्घाटन समारोह में संभागीय आयुक्त उदयपुर श्रीमती प्रज्ञा केवलरामानी ‘एनईपी 2020 शिक्षा को रटने से समझने की ओर ले जाने की प्रक्रिया है। यह नीति छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करती है। उन्होंने वेदों, उपनिषदों व भारत के प्राचीन शिक्षण संस्थानों के उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में ज्ञान जीवन का परम लक्ष्य माना गया है। हितोपदेश के प्रसिद्ध श्लोक ”विद्या ददाति विनयम्, विनयात् याति पात्रताम्, पात्रत्वाद् धन माप्नोति धनात् धर्म: तत: सुखम्” का उद्धरण देते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति बालकों को अकादमिक रूप से तैयार करने के साथ ही मानसिक व मानवीय रूप से भी तैयार करती है जिससे वे अपना जीवन यापन पूरी कुशलता से करने के साथ ही एक जिम्मेदार नागरिक भी बन सकें। उन्होंने कहा कि विद्या ऐसा धन है जिसे कोई चुरा नहीं सकता। सरदार वल्लभभाई पटेल की 150 जयंती की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सरदार पटेल शिक्षा को व्यक्तित्व निर्माण, राष्ट्रीय एकता, समग्र विकास के माध्यम के रूप में देखते थे जो विद्यार्थियों में देशभक्ति का मजबूत आधार व वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करे।

कार्यक्रम में निदेशक माध्यमिक शिक्षा श्री सीताराम जाट ने इस अवसर पर कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में बालक की स्कूली शिक्षा के साथ उसमें मानवीय गुणों के विकास पर बल दिया गया है। व्यावसायिक शिक्षा, रचनात्मकता व कौशल विकास की बात की गई है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रदेश में चलाए जा रहे मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान की जानकारी दी व सीबीए, ओआरएफ, प्रखर राजस्थान, विद्या समीक्षा केंद्र व शिक्षक एप जैसी विभाग की विभिन्न पहलों पर प्रकाश डाला।

परिषद निदेशक श्रीमती श्वेता फगेडिया ने स्वागत संबोधन देते हुए कहा कि ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा जगत में परिवर्तन का आधार स्तंभ सिद्ध हो रही है। यह नीति न केवल शिक्षण के तरीकों को आधुनिक बना रही है बल्कि विद्यार्थियों में सृजनात्मकता और आत्मनिर्भरता का विकास भी कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं बल्कि जीवन जीने की कला सिखाना है। उन्होंने बताया कि देश के सभी राज्यों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए किए जा रहे कार्यों पर चर्चा के लिए यह संगोष्ठी आयोजित की गई है।

10 से अधिक राज्यों ने लिया हिस्सा –

इस अवसर पर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गोवा, मणिपुर, नागालैंड, झारखंड सहित 10 राज्यों की राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषदों से आए विशेषज्ञों ने अपने राज्यों में एनईपी के क्रियान्वयन के दौरान अपनाई जा रही सर्वोत्तम प्रथाओं, नवाचारों, तथा शिक्षा में गुणवत्ता सुधार से जुड़े अनुभव साझा किए। सेमीनार के पहले दिन ‘खेल-खेल में शिक्षा’ पर आधारित शिक्षण पद्धति को मजबूत करने, बहुभाषी शिक्षा (MLE) को प्रोत्साहन देने तथा समावेशी शिक्षा के व्यापक क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि सीखने की प्रक्रिया को आनंददायक बनाना, बाल मनोविज्ञान के अनुरूप गतिविधि-आधारित शिक्षण को बढ़ावा देना और भाषा विविधता को सम्मान देना – शिक्षा की नई दिशा तय करने वाले प्रमुख तत्व हैं।

प्रतिभागियों ने एकमत से यह सुझाव दिया कि राज्यों के बीच नवाचारों का आदान-प्रदान शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। सेशन के अंत में प्रतिनिधियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए तथा भविष्य में संयुक्त अनुसंधान एवं प्रशिक्षण गतिविधियों पर सहमति व्यक्त की गई।

खेल-खेल में शिक्षा पर केंदित रहा पहला दिन –

सेमीनार के पहले दिन ‘खेल-खेल में शिक्षा’ पर आधारित शिक्षण पद्धति को मजबूत करने, बहुभाषी शिक्षा (MLE) को प्रोत्साहन देने तथा समावेशी शिक्षा के व्यापक क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान गोवा परिषद से आए प्रतिनिधि ने टॉय बेस्ड लर्निंग पर प्रजेंटेंशन देते हुए बाल मनोविज्ञान के अनुरूप गतिविधि-आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने और सीखने की प्रक्रिया को आनंददायक बनाने के तरीकों पर प्रकाश डाला। यह प्रक्रिया न सुनने वाले बच्चों के लिए भी एक आदर्श तकनीक है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी एनालिसिस एंड प्रायोरिटीज (एनआईईपीए) की प्रो. प्रणीति पांडा ने एनईपी-2020 के उद्देश्यों पर बात करते हुए कहा कि नीति का प्रमुख उद्देश्य सर्वांगीण विकास करना है। उन्होंने शिक्षकों को शिक्षण व्यवस्था की रीढ़ बताते हुए शिक्षकों के कौशल विकास पर बल दिया। यूनिसेफ की शिक्षा विशेषज्ञ श्रीमती अमृता सेनगुप्ता ने बुनियादी साक्षरता व संख्यात्मकता (एफएलएन) के विविध पहलुओ पर बात की व एलएलएफ के श्री संजय गुलाटी ने भाषा को बच्चे की सांस बताते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बहुभाषी पाठ्यक्रम व्यवस्था के महत्व पर प्रकाश डाला।